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दिवाली : गांव VERSUS शहर की दीपावली

दिवाली का त्यौहार दिए की दीपक से हुयी रोशनी का त्यौहार है। इसे दीपावली भी इसीलिए बुलाते हैं क्यों क्यूंकि इसी दिन मिट्टी के दिया से घर-आँगन को रोशनी से प्रज्ज्वलित करते हैं और घर में श्री गणेश - लक्ष्मी की आराधना और पूजा अर्चना करते हैं।  हिन्दु मान्यताओं के अनुसार दिवाली के शुभ दिन के सुअवसर पर घर या दुकान में गणेश-लक्ष्मी की स्थापना और पूजा की जाती हैं। और मनोकामना की जाती है के बुद्धिमान गणेश और धनवान माता लक्ष्मी यूँ ही पुरे साल घर में उसी स्थान पर विराजे रहे जहाँ उनकी पूजा इस दिवाली में की गयी है। दीपावली या दिवाली का त्योहार जगमगाती रोशनी और धूम-धाम करते हुए पटाखों का दिन है. अनेको तरह के पटाखे जलाये जाते है जो जलने के बाद भी धुआं छोड़ते रहते हैं।  आज मैं आपके सामने देश के विभिन्न भागों में दिवाली मनाने के अलग-अलग ढंग को पेश करूँगा जो की मैंने पिछले कुछ सालों से तस्वीरों में संजो कर रखा हुआ था ताकि आज आपके सामने ला सकूँ।  सही मायने में दिवाली ही एक ऐसा पर्व है जिसे धूम-धाम से मनाया जाता है।  मैं उस धूम-धाम की बात कर रहा हूँ जो पटाखे की आवाज़ से होती है। ...

बंदरों का आतंक

इंसान और बंदर देखने में तो काफी अलग होते हैं पर ढांचा बिलकुल एक जैसा । वही २ कान २ आँखें १ नाक और मुँह वही १०-१० उँगलियों के पंजे पर सिर्फ एक अकेली पूँछ ने सारा खेल बिगाड़ दिया। वरना वो जानवर होते हुए भी आज हम मनुष्यों के साथ पल-बढ़ रहे होते क्यूंकि बंदरों को इंसानो के साथ काम करना या यूँ कहें उनकी नक़ल उतारना बखूबी पसंद है या इंसानो को बंदरों के साथ घुलना मिलना अच्छा लगता है। तमाशा दिखाने आये हुए मदारी ने बन्दर के बच्चे को हाथों में पकड़ा हुआ था तभी तो मदारी भी इन कपि शावकों को बचपन से ही पाल पोस कर बड़ा करना चाहता हैं। वो शायद इसलिए के बचपन से इंसानो के बीच पले-बढे होने से इन् जानवरों में मनुष्यों के प्रति एक लगाव सा हो जाता है । वो अपने मालिक के उँगलियों पर नाचने के लिए तैयार किया जाने लगता है। बन्दर के बच्चे का आतंक  Baba Abhay holding a bad baby monkey- the Year 2013 लोग बड़े चाव से मदारी का तमाशा भी देखते हैं, पैसे लुटाते हैं, बंदर को केला-फल खिलाया जाता है इत्यादि-इत्यादि! खैर वो अलग बात है के मैं इस बन्दर के बच्चे को केला देने के बजाय Hajmola Candy देने गया थ...

देशी गन्ने का जूस- अमृत से सत्कार

गर्मी का महीना, भरी दोपहरी, कड़क धुप और उसपे  अगर मोटरसाइकिल से पड़ोस के गॉव में अपने किसी  हितैषी से मिलने जाना हो तो भी ये चिलचिलाती गर्मी हित-मीत वाले चाल -चलन नहीं दिखलाती है।  पर हित तो हित ही होते हैं । घर के दरवाजे पर पहुंचे नहीं के चारपाई लग गयी पीपल के पेड़ के निचे।    Extracting sugarcane juice- The Desi Style बाकायदा दुआ-सलाम होने के साथ-साथ बच्चों को जल्द से जल्द सेवा में अमृत पान कराने को कहा गया । बच्चे ने ईंख चिभते हुए सर हिलाया! पछुआ हूं-हूं (पश्चिम दिशा से बहनेवाली हवा) कर बह रही थी! सर से पैर तक पसीने से बुरा हाल हुए जा रहा था । तभी मोटर चलने की आवाज़ आई।  Sugarcane pile all over the verandah पल भर में इंजन की आवाज़ बंद होते ही बाल्टी भर गन्ने का शीतल अमृत रूपी रस और गिलास हाज़िर था । शहरों में बिकने वाले छिले हुए गन्ने के रस  की तरह चमकदार और साफ़ तो नहीं था पर गावं की मिटटी से जुड़ा ज़रा सा मठ -मैला पर स्वाद ऐसा की हलक से उतारते ही मानो जैसे मोक्ष प्राप्त हो गया हो!  ...

Mud Fishing

Yeah you heard it right, I am talking about Mud fishing because fresh-water fishing is just too mainstream. Unlike other fishing techniques like using spears, hooks or fishnets, mud fishing is an art of your hands. Often liked by kids and amateurs, fishing is always the best rewarding time-pass one can do. It requires your enthusiasm, patience and good visibility for a stubble concentration on your subject. Smartphone Photography by JNK   This incident is of my ancestral village in Gorakhpur. It was during the month of March-April, one of the ponds got dried up due to intolerable heat from the sun and the loo carried by hot winds. Well, this might sound weird but this sort of mid-summer atmospheric pressure is quiet common in North-western states of India and Uttar Pradesh is not an exception to this. As a result of the ponds drying up fastly & the water level dropping down rapidly, the fishes come to accumulate into the muddy water of the almost dry pond. This proves...

दर्द भरे फूलों की मीठी खुशबू

शेफाली, पारिजात, सिउली, हरसिंगार, प्राजक्ता, इत्यादि नामों से पूरे भारत में पहचाने जाने वाला इस फूल का पेड़ पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी मीठी सुंगंध के लिए माना और जाना जाता है! इसका वानस्पतिक नाम  Nycthanthes arbor-tristis  है, और अगर आप कभी दुर्गा पूजा में कलकत्ता पधारे हों तो आपने गौर किया होगा के  पूजा मंडप और पंडालों के आस- पास;  हज़ारों-लाखों लोगों की भीड़ और कई प्रकार के पकवानों की दुर्गन्ध एवं सुगंध को चीरती हुयी जो मीठी सी सुगंध आपको अपनी तरफ खिंच रही है वह इसी पारिजात के फूल की थी!  Image Source- http://harivarasanam.wordpress.com आप लोगों में से जिसे पता ना हो उन्हें बताना चाहूंगा के ' सिउली का फूल', पश्चिम बंगाल का (offcial)सरकारी मान्यता प्राप्त फूल है!  और हो भी क्यों ना, ये सिउली के फूल ही हैं जो रिहायसी इलाकों में अक्सर बाग़-बगीचों में पाये जाते हैं और इनकी खुशबू हमें दुर्गा-पूजा के निकट आने का  संकेत देती हैं!  जैसा के आप सभी जानते हैं के मेरा जन्म और पालन-पोषण पश्...