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Showing posts with the label Poetry and Proses

इतना पूजनीय कर दो वृक्ष को की कभी कोई न काट पाए

टेक्नोलॉजिकल उन्नति के तरफ अग्रसर हो रहे देश-दुनिया को पेड़ पौधों का महत्व और वृक्षारोपण के लिए जागरूक और उत्साहित करने का प्रयास इस हिंदी कविता द्वारा करने की कोशिश की गई है। "हो मूर्ति विसर्जन से निकला पौधा या हो कब्र पर झूमती फूलों की बेल ये सौगात है एक नए जीवन की जो है जाने वालों का खेल। इसकी सेवा वैसे ही करो जैसे की वे जानेवाले की धरोहर हो। तिनका-तिनका बढ़ते देख मन खुशी से सरोवर हो। इतना पूजनीय कर दो वृक्ष को की कभी कोई न काट पाए। दोस्त तो दोस्त दुश्मन भी उसकी छाँव में सुस्ताये। इतना पूजनीय कर दो वृक्ष को की कभी कोई न काट पाए" 🙏 🌱🌺🏵️🌼🌹🌳🌾🌿🍂🍁🌲🌵🌴🌷🥀💮🌸🌼 #PlantWhateverYouCan

मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ !

Friends, this is my second attempt to write a poetry or a कविता! The first attempt was in class 9 when I wrote a poetry for School's Annual Book. That poetry was appreciated and published. Now, its you who will decide about the fate of this one... :-) मैं  फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ  फिर से वापस जाना चाहता हूँ  उन हसीं लम्हों को दोबारा जीना चाहता हूँ माँ के आँचल से ढका रहना चाहता हूँ ! मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ ! तंग आगया हूँ इस दुनिया के लटको-झटकों से परेशां हूँ मैं अपने गर्लफ्रेंड के नखरों से, दोस्त भी आज कल खुद में वयस्थ हैं और मेरा हौसला भी अब पस्त हैं मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ ! ये ज़ालिम रस्मो रिवाज़ मुझे खाए जा रहे हैं उनसे बचू तो नियम कानून में फंसे जाये जा रहे हैं बड़ा होकर जैसे मैंने पाप किया हो जैसे किसीने मुझे श्राप दिया हो , मैं फिर से बच्चा बनना चाहता हूँ ! जीवन में अब कोई रस नहीं दीखता ! हर तरफ जो है वो हैं, नीरवता  दुसरो की खुशियों के लिए बहुत जी लिए हम, अब अपने लिए...

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं! Epic Lyrics

हिंदी फिल्म - "सिलसिला " (सं. 1981)  का यह मशहूर गीत गीतकार जावेद अख्तर द्वारा उकेरा हुआ एक बेहद ही खूबसूरत गाना है! इस डुएट को श्री लता मंगेशकर और श्री अमिताभ बच्चन ने अपने आवाज़ से नवाज़ा है! Love is everywhere - Copyright Applies इस EPIC LYRICS ब्लॉग पोस्ट में मैं आपके साथ साँझा कर रहा हूँ, वह अमिताभ बच्चन जी के आवाज़ में गुनगुनाये हुए कुछ अल्फ़ाज़ ! या यु कहे के एक ऐसी शेर ओ शायरी जिसने इस गाने को मेरे दिल में उकेर दिया! मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं तुम होती तो कैसा होता,  तुम ये केहती, तुम वो केहती तुम इस बात पे हैरां होती तुम उस बात पे कितनी हंसती? तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता ! मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं! ये रात है, या तुम्हारी जुल्फें खुली हुई हैं ! है चांदनी या तुम्हारी नजरों से मेरी रातें धूलि हुई हैं ! ये चाँद है या तुम्हारा कंगन सितारें है या तुम्हारा आँचल हवा का झोंका है या तुम्हारे बदन की खुसबू! ये पत्तियों की है सरसराहट के तुमने चुपके से कुछ कहा है! ये सोचता हूँ मैं कब से गुमसुम के ज...