Janak Kr Yadav

Always on a learning spree

Mattress of Junk 

इस दुनिया में पागलों की कमी नहीं है! कुछ होते हैं पर दीखते नहीं और जो दीखते हैं वो होते नहीं! इन्हे न कोई रोकने वाला न कोई टोकने वाला! उनकी हरकतें ही हमें अपनी तरफ आकर्षित करती हैं इसलिए चाहते हुए भी नज़र नहीं हटती! कई दिनों से मेरा साक्छात्कार भी मानसिक रूप से पैदल लोगों से ज्यादा हो रहा है! वे आपको किसी भी जगह, किसी भी समय दिख सकते हैं! कभी कोई(पागल) मुझे कूड़े-कचरे के ढेर पर आराम से लेट कर गहन चिंता में मिला तो कभी कोई भरी गर्मी की दोपहरी में ताड़ के पत्तों का चिल्लम बना कर गांजा सुलगाते हुए मिला! यहाँ तक की रेलवे स्टेशन पर भी इनके कारनामे खुल्लम-खुल्ला होते हैं!


Smartphone Photography by JNK

Smartphone Photography by JNK- Craving for a pot

Smartphone Photography by JNK @ Uttar Pradesh



Smartphone Photography by JNK @ Uttar Pradesh


भूख-प्यास लगती है तो दूसरों के सामने स्वतः हाथ पसार देते हैं! इनके अंदर किंचित भी घमंड नहीं आता के दूसरों से कुछ मूह खोल कर मांगना मतलब अपनी बेइज़्ज़ती करना होता है! इन्हे ना लोक-लाज का डर ना ही कल सुबह ऑफिस जाने की जल्दी ना प्रोजेक्ट पूरा कर बॉस को देने का डेडलाइन और न ही कल के भोजन के लिए आज काम करने की जरुरत ! इन्हे समाज के काम करने के तरीके से कोई मतलब नहीं, जो भी करते हैं खुद से करते हैं भले ही ज़माना इन्हे मानसिक समझे! पर जिस प्रकार साधारण लोगों की दुनिया होती हैं उसी प्रकार इनकी भी एक छोटी सी दुनिया है जिसमे वे हमेशा खोये रहते हैं! जरुरत पड़ती है तो ही अविकृत मनुष्यों से मुह लगते हैं वरना कौन सा EMI पेमेंट की आखिरी तारीख भागे जा रही है जो किसी भी ऐरे-गैरे के अपने मतलब के लिए मूह लगाया जाये!

Smartphone Photography by JNK @ Burdwan Railway Station



Flooded with wishes from friends & relatives over Facebook and SMS, I was overwhelmed and excited. Suddenly, I thought of googling something. And to my surprise there was a google-doodle with cakes, pastries and candles on them. I assumed that it would be for a celebrity born on 8th of August, for example- Roger Federer who was also born on the same date and month as of mine, only the difference is of birth years. But my assumption turned wrong when I curiously hovered the mouse on this doodle just to check for whom it was. As soon as I saw "Happy Birthday Janak Kumar!" while the cursor key was resting in the center of this doodle, I was taken aback. I checked it again and it wasn't for any other celebrity other than me. Thank you Google for this wonderful doodle on my birthday. You surprised me at instant.
Yes, I am talking about Mud fishing because fresh-water fishing is just too mainstream. Unlike other fishing techniques like using spears, hooks or fishnets, mud fishing is an art of your hands. Often liked by kids and amateurs, fishing is always the best rewarding time-pass one can do. It requires your enthusiasm, patience and good visibility for a stubble concentration on your subject.
Smartphone Photography by JNK
 This incident is of my ancestral village in Gorakhpur. It was during the month of March-April, one of the ponds got dried up due to intolerable heat from the sun and the loo carried by hot winds. Well, this might sound weird but this sort of mid-summer atmospheric pressure is quiet common in North-western states of India and Uttar Pradesh is not an exception to this. As a result of the ponds drying up fastly & the water level dropping down rapidly, the fishes come to accumulate into the muddy water of the almost dry pond. This proves to be the best time for kids and other mud-fishing enthusiasts to fold up their sleeves and jump into this muddy water to catch few fishes for tonight's dinner. 
Smartphone Photography by JNK
And to my disbelief, the outcome of mud-fishing is fruitful, atleast fruitful enough to be served as Fish fry, Fish curry or any other dish for that night's dinner. This lucky boy(see image above) along with his other mates caught up plenty of fish with his bare hands and expertise. It fascinated me as if why I wasn't grown-up in my village to do let my hands-down for mud-fishing during Indian summer. Sigh!!
कुछ ढूंढली यादें और कंप्यूटर में रक्खे हुए कुछ फोटो ने मेरा ध्यान आकर्षित किया! जैसे ही मैंने फोटो देखने के लिए खोला तो सहसा याद आगया के यह सारे फोटो 2012 के सावन के महीने की हैं! वह मेरा आखरी सावन था जब बाबा धाम से लौटने के बाद, आखरी सोमवार को मैं अपने दोस्तों के साथ कलकत्ता के निमतला समसान घाट स्तिथ बाबा भूतनाथ के मंदिर गया था! आखरी सावन इसलिए क्यूंकि 2013 में पिता जी के परलोक सिधारने के बाद; ना ही मैं बाबा धाम गया और ना ही सावन के महीने में भूतनाथ मंदिर! समय बीतता गया, संन् 2014 आगया और मैं फिर से उसी जगह खड़ा हूँ जहाँ मैंने खुद को छोड़ा था! आज उन्ही यादों और अनुभव को कुछ पुराने फोटो के जरिये आपके सामने ला रहा हूँ!
Lord Shiva at Bhootnath Temple-- Smartphone Photography by JNK

Bandhaghat Launch Ghat-Howrah side (Smartphone Photography by JNK)

मैं हावडा में रहता हूँ, इसलिए बाबा के मंदिर जाने के लिए मुझे बांधाघाट लांच घाट से फेरी पकड़नी पड़ती है! इस सुभ यात्रा की शुरुआत गंगा नदी पर सफर करने से शुरू होती है!

Smartphone Photography by JNK

गंगा नदी पार करने के बाद, मंदिर के सामने सटे हुए नल से हाथ-पैर धो कर फूल-पत्रिका खरीदने के उपरांत मंदिर के द्वार के सामने लगे हुए कतार में लग जाने की कार्यविधि चालू होती है! सावन के महीने में श्रद्धालुओं के हुजूम के बीच लगे हुए कतार का आखरी छोड़ भी खोज पाना बहोत मुश्किल हो जाता है, क्यूंकि यह नीमतल्ला घाट से भी आगे बड़ाबाजार के पोस्ता इलाके तक लम्बी लग जाती है!

Smartphone Photography by JNK

Smartphone Photography by JNK

शिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ अलग-अलग विषयों पर बनायीं हुयी मूर्तियां और नैतिक बातों पर आधारित झुग्गियां भी देखने को मिलता है! जैसा के ऊपर वाले चित्र में आप देख रहे होंगे के भगवान शिव-संभु अपने प्रत्येक भक्त के साथ रहते हैं, चाहे वह दर-बदर भटक कर बच्चों को गुब्बारे बेचने वाला ही क्यों ना हो!

Smartphone Photography by JNK
  

Smartphone Photography by JNK

 जैसे जैसे आप अंदर बढ़ते जाते हैं, वैसे वैसे ही मंदिर के अंदर का दृश्य मनोरम होते जाता है! शेषनाग के छाया में बैठे अर्धनासिरवार के दर्शन से ऐसा प्रतीत होता है मानो आत्मा-परमात्मा में विलीन हो रही हो!
Image Source- Admin of  http://dharmikraj.blogspot.in/

समय का मूल्य निजी जीवन में ही नहीं, बल्कि मंदिरों में लागु होता है! अगर आप समय पर पहुंच गए तो बाबा भूतेस्वरनाथ के श्रृंगार विधि के भी साक्षी बन सकते हैं! ऐसा सौभाग्य मुझे प्राप्त हो चूका है, जानने के लिए पढ़े मेरा दूसरा ब्लॉग-पोस्ट


Smartphone Photography by JNK


 दर्शन के उपरांत आरती करने का समय हो जाता है, भक्तजन मंदिर से बाहर बने मंदिर के प्रांगण में कपूर और आरती की थाल लेकर सामने के दीवार पर अंकित मन्त्रों के उच्चारण के साथ आरती करने लगते हैं! आरती हो जाने पर, आरती की थाल में स्वेत कपूर की ज्वलनशील शुद्धता से निकले हुए कालिख का ही टिका कर लेना पड़ता है, अगर आप चाहें तो बाकि की कालिख उसी कपूर के कागज में पोंछ कर अपने हिट-मित्रों को भी टीकाकरण के लिए दे सकते हैं या अपने घर ले जा सकते हैं!
                          ज़रा ठहरिये, सिर्फ बाबा भूतनाथ के दर्शन कर वापस घर न जाएं! अभी तो मोटा-महादेव के दर्शन बाकि हैं! बाबा भूतनाथ के मंदिर के विपरीत से कलकत्ता सर्कुलर रेलवे की पटरियां गुजरती है, एक सकरी सी गली से घुसते हुए आपको रेल की पटरियां दिख जाएँगी, उन्हें पार करते है ठीक सामने माँ काली, माता जगदम्बा, और पेड़ में अंकित श्री गणेश जी के दर्शन हो जायेंगे! बस उसी मंदिर के बगल से आप मोटा-बाबा जिन्हे मोटा महादेव भी कहा जाता है उनके मंदिर जा सकते हैं!
Smartphone Photography by JNK

मोटा-महादेव का मंदिर काफी पुराना है, ऐसा आपको मंदिर की बाहरी दीवारों को देख कर ही पता चल जायेगा! उन्हें मोटा बाबा क्यों कहते हैं शायद उस विशाल शिवलिंग को देख कर ही समझ आजाता है! लोग यहाँ तक कहते हैं के मोटा-बाबा का शिवलिंग हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ते रहता हैं और जिस दिन यह शिवलिंग अपने मंदिर के गुम्बज से स्पर्श होगा, उस दिन कलयुग का अंत हो जायेगा!

Smartphone Photography by JNK

मोटा-बाबा के पूजा और दर्शन के बाद, पेड़े का प्रसाद आपस में बांटते हुए हम सभी लोग वापस अहिरीटोला से बांधाघाट के लिए लांच पकड़ कर वापस नदी के इस पार आ जाते हैं!

Overwhelmed by the trailers of Salman Khan's latest movie KICK starring Jacqueline Fernandez as female lead, the fandom for Sallu bhai once again rose in me. Coincidentally, my friend who is also a die hard fan of Salman Khan constructed a plan of watching KICK in a nearby local cinema hall as all the seats of Inox were full for the first day-first shows. We visited a renowned local cinema hall, let's call it "Hall-1" where KICK wasn't released. Surprised and disheartened we visited another local cinema hall named CHANDAN Cinema which is just outside Liluah Railway station, in case if you want to have a glimpse of it from the train to and fro Howrah. 


Accidentally while moving towards the cinema hall, we first got the glimpse of the bigger poster of a bengali movie BINDAAS starring Dev Adhikari, Shrabanti Chatterjee & Sayantika Banerjee in lead roles. Almost on the verge of being dejected, me moved closer and then saw the poster of Salman's KICK which bought a sigh of relief on our faces. There were plenty of chances for us to miss-out watching KICK on the first day of premiere if this cinema hall too doesn't have the movie released before this Eid. As a consequence of the festivity of Eid in 2014, Bindaas and Kick, both films were released by this cinema hall with two different shows on each movie. 
Image Source- http://bollyspice.com

Last but the not the least, we entered the cinema hall on time, sat down in our respective seats there. Whistled, shouted and clapped being BINDASS with other Sallu fans while watching @BeingSalmanKhan's KICK

In case if you can't figure out the motive or meaning behind this blogpost, I would like to narrate in pure Sallu bhai's style - "मैं दिल में आता हूँ, समझ में नहीं!"
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